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Jagjit singh B Special: जगजीत सिंह ने शायरों की महफ़िलों में वाह-वाह की दाद पर इतराती ग़ज़लों को आम आदमी तक पहुंचानाया। आसान नहीं था सफर।

by टीम, भारतीय बुलेटिन
February 8, 2022
in मनोरंजन
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जगजीत सिंह (Jagjit Singh) का लोकप्रिय ग़जल (Ghazal) गायकों में शुमार है। उनका संगीत अत्यंत मधुर है। जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने ग़जलों (Ghazal) को उस वक्त आम आदमी तक पहुंचाया जब केवल उर्दू जानने वालों को ही उसकी मिल्कियत समझा जाता था, नवाबों और शायरों की महफिल में इतराती ग़जलों को यदि आम आदमी तक किसी ने पहुंचाया तो वह केवल व केवल हैं जगजीत सिंह।

Jagjit singh

नयी दिल्लीः जगजीत सिंह (Jagjit Singh) का लोकप्रिय ग़जल (Ghazal) गायकों में शुमार है। उनका संगीत अत्यंत मधुर है। जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने ग़जलों (Ghazal) को उस वक्त आम आदमी तक पहुंचाया जब केवल उर्दू जानने वालों को ही उसकी मिल्कियत समझा जाता था, नवाबों और शायरों की महफिल में इतराती ग़जलों को यदि आम आदमी तक किसी ने पहुंचाया तो वह केवल व केवल हैं जगजीत सिंह। उनकी गज़लों ने उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ पैदी।

Jagjit Singh) को सन 2003 में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 2014 में उनके सम्मान व स्मृति में सरकार ने दो डाक टिकट भी जारी किये गेय।

जगजीत सिंह (Jagjit Singh) का लोकप्रिय ग़जल (Ghazal) गायकों में शुमार है। उनका संगीत अत्यंत मधुर है। जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने ग़जलों (Ghazal) को उस वक्त आम आदमी तक पहुंचाया जब केवल उर्दू जानने वालों को ही उसकी मिल्कियत समझा जाता था, नवाबों और शायरों की महफिल में इतराती ग़जलों को यदि आम आदमी तक किसी ने पहुंचाया तो वह केवल व केवल हैं जगजीत सिंह।

जगजीत सिंह/Jagjit sing के बारे में जानकारी

जगजीत जी का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर में हुआ था। पिता सरदार अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे। जगजीत जी का परिवार मूलतः पंजाब (भारत) के रोपड़ ज़िले के दल्ला गांव का रहने वाला है। मां बच्चन कौर पंजाब के ही समरल्ला के उट्टालन गांव की रहने वाली थीं। जगजीत का बचपन का नाम जीत था। करोड़ों सुनने वालों के चलते सिंह साहब कुछ ही दशकों में जग को जीतने वाले जगजीत बन गए। शुरूआती शिक्षा गंगानगर के खालसा स्कूल में हुई और बाद पढ़ने के लिए जालंधर आ गए। डीएवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और इसके बाद कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया।

बहुतों की तरह जगजीत जी का पहला प्यार भी परवान नहीं चढ़ सका। अपने उन दिनों की याद करते हुए वे कहते हैं, ”एक लड़की को चाहा था। जालंधर में पढ़ाई के दौरान साइकिल पर ही आना-जाना होता था। लड़की के घर के सामने साइकिल की चैन टूटने या हवा निकालने का बहाना कर बैठ जाते और उसे देखा करते थे। बाद मे यही सिलसिला बाइक के साथ जारी रहा। पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं थी। कुछ क्लास मे तो दो-दो साल गुज़ारे.” जालंधर में ही डीएवी कॉलेज के दिनों गर्ल्स कॉलेज के आसपास बहुत फटकते थे। एक बार अपनी चचेरी बहन की शादी में जमी महिला मंडली की बैठक में जाकर गीत गाने लगे थे। पूछे जाने पर कहते हैं कि सिंगर नहीं होते तो धोबी होते। पिता के इजाज़त के बग़ैर फ़िल्में देखना और टाकीज में गेट कीपर को घूंस देकर हॉल में घुसना आदत थी।

पिता बनाना चाहते थे आईएएस अधिकारी

पिता की ख़्वाहिश थी कि उनका बेटा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाए लेकिन जगजीत पर गायक (Ghazal) बनने की धुन सवार थी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान संगीत में उनकी दिलचस्पी देखकर कुलपति प्रोफ़ेसर सूरजभान ने जगजीत सिंह(Jagjit Singh) जी को काफ़ी उत्साहित किया। उनके ही कहने पर वे 1965 में मुंबई आ गए। यहां से संघर्ष का दौर शुरू हुआ। वे पेइंग गेस्ट के तौर पर रहा करते थे और विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाकर या शादी-समारोह वगैरह में गाकर रोज़ी रोटी का जुगाड़ करते रहे। 1967 में जगजीत जी की मुलाक़ात चित्रा जी से हुई। दो साल बाद दोनों 1969 में परिणय सूत्र में बंध गए।

पेट पालने के लिए बडे लोगों की पार्टियों में गाया करते थे

जगजीत सिंह फ़िल्मी दुनिया में पार्श्वगायन का सपना लेकर आए थे। तब पेट पालने के लिए कॉलेज और ऊंचे लोगों की पार्टियों में अपनी पेशकश दिया करते थे। रफ़ी-किशोर-मन्नाडे जैसे महारथियों के दौर में पार्श्व गायन का मौक़ा मिलना बहुत दूर था। जगजीत सिंह की जुबानी, ”संघर्ष के दिनों में कॉलेज के लड़कों को ख़ुश करने के लिए मुझे तरह-तरह के गाने गाने पड़ते थे क्योंकि शास्त्रीय गानों पर लड़के हूट कर देते थे।” तब की मशहूर म्यूज़िक कंपनी एच एम वी (हिज़ मास्टर्स वॉयस) को लाइट क्लासिकल ट्रेंड पर टिके संगीत की दरकार थी। जगजीत जी ने वही किया और पहला एलबम ‘द अनफ़ॉरगेटेबल्स हिट रहा। इस तरह सफर चलता रहा है बहुत सी फिल्मों मे गाने का मौका मिला।

विवादों में भी रहे जगजीत सिंह/Jagjit Sngh

बहुत कम लोगों को पता होगा कि अपने संघर्ष के दिनों में जगजीत सिंह इस कदर टूट चुके थे कि उन्होंने स्थापित प्लेबैक सिंगरों पर तीखी टिप्पणी तक कर दी थी। हालांकि बाद में उन्होंने इसे अपनी भूल स्वीकार किया हैं।

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टीम, भारतीय बुलेटिन
Author: टीम, भारतीय बुलेटिन

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